M N Dutt
Hearing that Indrajit slain, amazement have seized us all. Having conferred on us this holy freedom from fear, O Kākutstha, O repressor of enemies. you through good fortune, will grow in victory.
पदच्छेदः
| दत्त्वा | दत्त्वा (√दा + क्त्वा) |
| पुण्याम् | पुण्य (२.१) |
| इमां | इदम् (२.१) |
| वीर | वीर (८.१) |
| सौम्याम् | सौम्य (२.१) |
| अभयदक्षिणाम् | अभय–दक्षिणा (२.१) |
| दिष्ट्या | दिष्टि (३.१) |
| वर्धसि | वर्धसि (√वृध् लट् म.पु. ) |
| काकुत्स्थ | काकुत्स्थ (८.१) |
| जयेनामित्रकर्शन | जय (३.१)–अमित्र–कर्शन (८.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| द | त्त्वा | पु | ण्या | मि | मां | वी | र |
| सौ | म्या | म | भ | य | द | क्षि | णाम् |
| दि | ष्ट्या | व | र्ध | सि | का | कु | त्स्थ |
| ज | ये | ना | मि | त्र | क | र्श | न |