M N Dutt
And, O Brāhmaṇa, even Apsarās in Nandana, ten attendants of Mahendra, as well as sages and human beings, have been devoured by this one.पदच्छेदः
| नन्दने | नन्दन (७.१) |
| ऽप्सरसः | अप्सरस् (१.३) |
| सप्त | सप्तन् (१.१) |
| महेन्द्रानुचरा | महत्–इन्द्र–अनुचर (१.३) |
| दश | दशन् (१.१) |
| अनेन | इदम् (३.१) |
| भक्षिता | भक्षित (√भक्षय् + क्त, १.३) |
| ब्रह्मन् | ब्रह्मन् (८.१) |
| ऋषयो | ऋषि (१.३) |
| मानुषास्तथा | मानुष (१.३)–तथा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| न | न्द | ने | ऽप्स | र | सः | स | प्त |
| म | हे | न्द्रा | नु | च | रा | द | श |
| अ | ने | न | भ | क्षि | ता | ब्र | ह्म |
| न्नृ | ष | यो | मा | नु | षा | स्त | था |