M N Dutt
Do you then, o lord having immeasurable prowess, pretending to give him a boon, give stupefaction (instead). Thereby the welfare of the people would be secured, and the honour of this one too shall be maintained.
पदच्छेदः
| वरव्याजेन | वर–व्याज (३.१) |
| मोहो | मोह (१.१) |
| ऽस्मै | इदम् (४.१) |
| दीयताम् | दीयताम् (√दा प्र.पु. एक.) |
| अमितप्रभ | अमित–प्रभा (८.१) |
| लोकानां | लोक (६.३) |
| स्वस्ति | स्वस्ति (२.१) |
| चैव | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| स्याद् | स्यात् (√अस् विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| भवेद् | भवेत् (√भू विधिलिङ् प्र.पु. एक.) |
| अस्य | इदम् (६.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| संनतिः | संनति (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| व | र | व्या | जे | न | मो | हो | ऽस्मै |
| दी | य | ता | म | मि | त | प्र | भ |
| लो | का | नां | स्व | स्ति | चै | व | स्या |
| द्भ | वे | द | स्य | च | सं | न | तिः |