M N Dutt
And going to the waters of Sarayü all objects, mobile and immobile, having bathed there, repaired to the excellent celestial region.पदच्छेदः
| गत्वा | गत्वा (√गम् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सरयूतोयं | सरयू–तोय (२.१) |
| स्थावराणि | स्थावर (१.३) |
| चराणि | चर (१.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्राप्य | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्) |
| तत्तोयविक्लेदं | तद्–तोय–विक्लेद (२.१) |
| देवलोकम् | देव–लोक (२.१) |
| उपागमन् | उपागमन् (√उपा-गम् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ग | त्वा | तु | स | र | यू | तो | यं |
| स्था | व | रा | णि | च | रा | णि | च |
| प्रा | प्य | त | त्तो | य | वि | क्ले | दं |
| दे | व | लो | क | मु | पा | ग | मन् |