एष तात दशग्रीवो दूतं प्रेषितवान्मम ।
दीयतां नगरी लङ्का पूर्वं रक्षोगणोषिता ।
मयात्र यदनुष्ठेयं तन्ममाचक्ष्व सुव्रत ॥
एष तात दशग्रीवो दूतं प्रेषितवान्मम ।
दीयतां नगरी लङ्का पूर्वं रक्षोगणोषिता ।
मयात्र यदनुष्ठेयं तन्ममाचक्ष्व सुव्रत ॥
पदच्छेदः
| एष | एतद् (१.१) |
| तात | तात (८.१) |
| दशग्रीवो | दशग्रीव (१.१) |
| दूतं | दूत (२.१) |
| प्रेषितवान्मम | प्रेषितवत् (√प्र-इषय् + क्तवतु, १.१)–मद् (६.१) |
| दीयतां | दीयताम् (√दा प्र.पु. एक.) |
| नगरी | नगरी (१.१) |
| लङ्का | लङ्का (१.१) |
| पूर्वं | पूर्वम् (अव्ययः) |
| रक्षोगणोषिता | रक्षस्–गण–उषित (√वस् + क्त, १.१) |
| मयात्र | मद् (३.१)–अत्र (अव्ययः) |
| यद् | यद् (१.१) |
| अनुष्ठेयं | अनुष्ठेय (√अनु-स्था + कृत्, १.१) |
| तन्ममाचक्ष्व | तद् (२.१)–मद् (६.१)–आचक्ष्व (√आ-चक्ष् लङ् म.पु. ) |
| सुव्रत | सुव्रत (८.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ष | ता | त | द | श | ग्री | वो | दू | तं | प्रे | षि |
| त | वा | न्म | म | दी | य | तां | न | ग | री | ल | ङ्का |
| पू | र्वं | र | क्षो | ग | णो | षि | ता | म | या | त्र | य |
| द | नु | ष्ठे | यं | त | न्म | मा | च | क्ष्व | सु | व्र | त |