M N Dutt
Thus accosted, that foremost of ascetics, the Brahmarși Viśravă spoke to the lord of riches (standing) with joined hands, 'O son, listen to my words.
पदच्छेदः
| ब्रह्मर्षिस्त्वेवम् | ब्रह्मर्षि (१.१)–तु (अव्ययः)–एवम् (अव्ययः) |
| उक्तो | उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| ऽसौ | अदस् (१.१) |
| विश्रवा | विश्रवस् (१.१) |
| मुनिपुंगवः | मुनि–पुंगव (१.१) |
| उवाच | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| धनदं | धनद (२.१) |
| वाक्यं | वाक्य (२.१) |
| शृणु | शृणु (√श्रु लोट् म.पु. ) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| मम | मद् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ब्र | ह्म | र्षि | स्त्वे | व | मु | क्तो | ऽसौ |
| वि | श्र | वा | मु | नि | पुं | ग | वः |
| उ | वा | च | ध | न | दं | वा | क्यं |
| शृ | णु | पु | त्र | व | चो | म | म |