पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| क्रोधेन | क्रोध (३.१) |
| मया | मद् (३.१) |
| चोक्तो | च (अव्ययः)–उक्त (√वच् + क्त, १.१) |
| ध्वंसस्वेति | ध्वंसस्व (√ध्वंस् लोट् म.पु. )–इति (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
| श्रेयोऽभियुक्तं | श्रेयस्–अभियुक्त (√अभि-युज् + क्त, २.१) |
| धर्म्यं | धर्म्य (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| शृणु | शृणु (√श्रु लोट् म.पु. ) |
| पुत्र | पुत्र (८.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| मम | मद् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | क्रो | धे | न | म | या | चो | क्तो |
| ध्वं | स | स्वे | ति | पु | नः | पु | नः |
| श्रे | यो | ऽभि | यु | क्तं | ध | र्म्यं | च |
| शृ | णु | पु | त्र | व | चो | म | म |