M N Dutt
Going to the city of Lankā, he presented himself before Vibhīşaņa. And having received him with honour, he asked him as to the cause of his visit.
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| गत्वा | गत्वा (√गम् + क्त्वा) |
| नगरीं | नगरी (२.१) |
| लङ्काम् | लङ्का (२.१) |
| आससाद | आससाद (√आ-सद् लिट् प्र.पु. एक.) |
| विभीषणम् | विभीषण (२.१) |
| मानितस्तेन | मानित (√मानय् + क्त, १.१)–तद् (३.१) |
| धर्मेण | धर्म (३.१) |
| पृष्टश्चागमनं | पृष्ट (√प्रच्छ् + क्त, १.१)–च (अव्ययः)–आगमन (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | ग | त्वा | न | ग | रीं | ल | ङ्का |
| मा | स | सा | द | वि | भी | ष | णम् |
| मा | नि | त | स्ते | न | ध | र्मे | ण |
| पृ | ष्ट | श्चा | ग | म | नं | प्र | ति |