पदच्छेदः
| दृष्टं | दृष्ट (√दृश् + क्त, १.१) |
| मे | मद् (६.१) |
| नन्दनं | नन्दन (१.१) |
| भग्नम् | भग्न (√भञ्ज् + क्त, १.१) |
| ऋषयो | ऋषि (१.३) |
| निहताः | निहत (√नि-हन् + क्त, १.३) |
| श्रुताः | श्रुत (√श्रु + क्त, १.३) |
| देवानां | देव (६.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| समुद्योगस्त्वत्तो | समुद्योग (१.१)–त्वद् (५.१) |
| राजञ् | राजन् (८.१) |
| श्रुतश्च | श्रुत (√श्रु + क्त, १.१)–च (अव्ययः) |
| मे | मद् (६.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दृ | ष्टं | मे | न | न्द | नं | भ | ग्न |
| मृ | ष | यो | नि | ह | ताः | श्रु | ताः |
| दे | वा | नां | तु | स | मु | द्यो | ग |
| स्त्व | त्तो | रा | ज | ञ्श्रु | त | श्च | मे |