पदच्छेदः
| देव्या | देवी (६.१) |
| दग्धं | दग्ध (√दह् + क्त, १.१) |
| प्रभावेन | प्रभाव (३.१) |
| यच्च | यद् (१.१)–च (अव्ययः) |
| सव्यं | सव्य (१.१) |
| तवेक्षणम् | त्वद् (६.१)–ईक्षण (१.१) |
| एकाक्षिपिङ्गलेत्येव | एक–अक्षि–पिङ्गल–इति (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| नाम | नाम (अव्ययः) |
| स्थास्यति | स्थास्यति (√स्था लृट् प्र.पु. एक.) |
| शाश्वतम् | शाश्वतम् (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| दे | व्या | द | ग्धं | प्र | भा | वे | न |
| य | च्च | सा | व्यं | त | वे | क्ष | णम् |
| ए | का | क्षि | पि | ङ्ग | ले | त्ये | व |
| ना | म | स्था | स्य | ति | शा | श्व | तम् |