पदच्छेदः
| एवं | एवम् (अव्ययः) |
| तेन | तद् (३.१) |
| सखित्वं | सखी–त्व (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| प्राप्यानुज्ञां | प्राप्य (√प्र-आप् + ल्यप्)–अनुज्ञा (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| शंकरात् | शंकर (५.१) |
| आगम्य | आगम्य (√आ-गम् + ल्यप्) |
| च | च (अव्ययः) |
| श्रुतो | श्रुत (√श्रु + क्त, १.१) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| मे | मद् (४.१) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| पापविनिश्चयः | पाप–विनिश्चय (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | वं | ते | न | स | खि | त्वं | च |
| प्रा | प्या | नु | ज्ञां | च | शं | क | रात् |
| आ | ग | म्य | च | श्रु | तो | ऽयं | मे |
| त | व | पा | प | वि | नि | श्च | यः |