पदच्छेदः
| स्फाटिकैः | स्फाटिक (३.३) |
| काञ्चनैश्चित्रैः | काञ्चन (३.३)–चित्र (३.३) |
| स्तम्भैः | स्तम्भ (३.३) |
| सर्वत्र | सर्वत्र (अव्ययः) |
| शोभितम् | शोभित (√शोभय् + क्त, २.१) |
| वैदूर्यकृतशोभं | वैडूर्य–कृत (√कृ + क्त)–शोभा (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| किङ्किणीजालकं | किङ्किणी–जालक (२.१) |
| तथा | तथा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स्फा | टि | कैः | का | ञ्च | नै | श्चि | त्रैः |
| स्त | म्भैः | स | र्व | त्र | शो | भि | तम् |
| वै | दू | र्य | कृ | त | शो | भं | च |
| कि | ङ्कि | णी | जा | ल | कं | त | था |