M N Dutt
The gods have set their face against you on account of a certain misdeed of your; and having for this, been reduced to this condition, you do not understand things.
पदच्छेदः
| दैवतानि | दैवत (१.३) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नन्दन्ति | नन्दन्ति (√नन्द् लट् प्र.पु. बहु.) |
| धर्मयुक्तेन | धर्म–युक्त (√युज् + क्त, ३.१) |
| केनचित् | कश्चित् (३.१) |
| येन | यद् (३.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| ईदृशं | ईदृश (२.१) |
| भावं | भाव (२.१) |
| नीतस्तच्च | नीत (√नी + क्त, १.१)–तद् (२.१)–च (अव्ययः) |
| न | न (अव्ययः) |
| बुध्यसे | बुध्यसे (√बुध् लट् म.पु. ) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| दै | व | ता | नि | हि | न | न्द | न्ति |
| ध | र्म | यु | क्ते | न | के | न | चित् |
| ये | न | त्व | मी | दृ | शं | भा | वं |
| नी | त | स्त | च्च | न | बु | ध्य | से |