M N Dutt
It must be known by what influence Bhavasvara sport here king-like. He does not know that an occasion of fear has presented itself?'
पदच्छेदः
| केन | क (३.१) |
| प्रभावेन | प्रभाव (३.१) |
| भवस्तत्र | भव (१.१)–तत्र (अव्ययः) |
| क्रीडति | क्रीडति (√क्रीड् लट् प्र.पु. एक.) |
| राजवत् | राजन्–वत् (अव्ययः) |
| विज्ञातव्यं | विज्ञातव्य (√वि-ज्ञा + कृत्, २.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| जानीषे | जानीषे (√ज्ञा लट् म.पु. ) |
| भयस्थानम् | भय–स्थान (२.१) |
| उपस्थितम् | उपस्थित (√उप-स्था + क्त, २.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| के | न | प्र | भा | वे | न | भ | व |
| स्त | त्र | क्री | ड | ति | रा | ज | वत् |
| वि | ज्ञा | त | व्यं | न | जा | नी | षे |
| भ | य | स्था | न | मु | प | स्थि | तम् |