M N Dutt
Having said this, O Rama, Ravana seizing the mountain with his arms, lifted it up at once; and then the mountain trembled greatly.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्त्वा | उक्त्वा (√वच् + क्त्वा) |
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| राजन् | राजन् (८.१) |
| भुजान् | भुज (२.३) |
| प्रक्षिप्य | प्रक्षिप्य (√प्र-क्षिप् + ल्यप्) |
| पर्वते | पर्वत (७.१) |
| तोलयामास | तोलयामास (√तोलय् प्र.पु. एक.) |
| तं | तद् (२.१) |
| शैलं | शैल (२.१) |
| समृगव्यालपादपम् | स (अव्ययः)–मृग–व्याल–पादप (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त्वा | त | तो | रा | ज |
| न्भु | जा | न्प्र | क्षि | प्य | प | र्व | ते |
| तो | ल | या | मा | स | तं | शै | लं |
| स | मृ | ग | व्या | ल | पा | द | पम् |