पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| वेदवती | वेदवती (१.१) |
| क्रुद्धा | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| केशान् | केश (२.३) |
| हस्तेन | हस्त (३.१) |
| साछिनत् | तद् (१.१)–अछिनत् (√छिद् लङ् प्र.पु. एक.) |
| उवाचाग्निं | उवाच (√वच् लिट् प्र.पु. एक.)–अग्नि (२.१) |
| समाधाय | समाधाय (√समा-धा + ल्यप्) |
| मरणाय | मरण (४.१) |
| कृतत्वरा | कृत (√कृ + क्त)–त्वरा (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | वे | द | व | ती | क्रु | द्धा |
| के | शा | न्ह | स्ते | न | सा | च्छि | नत् |
| उ | वा | चा | ग्निं | स | मा | धा | य |
| म | र | णा | य | कृ | त | त्व | रा |