M N Dutt
As I have in this world been dishonoured by you you are nefarious. I shall again be born to compass your destruction.
पदच्छेदः
| यस्मात् | यस्मात् (अव्ययः) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| धर्षिता | धर्षित (√धर्षय् + क्त, १.१) |
| चाहम् | च (अव्ययः)–मद् (१.१) |
| अपापा | अपाप (१.१) |
| चाप्यनाथवत् | च (अव्ययः)–अपि (अव्ययः)–अनाथ–वत् (अव्ययः) |
| तस्मात् | तस्मात् (अव्ययः) |
| तव | त्वद् (६.१) |
| वधार्थं | वध–अर्थ (२.१) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| समुत्पत्स्याम्यहं | समुत्पत्स्यामि (√समुत्-पद् लृट् उ.पु. )–मद् (१.१) |
| पुनः | पुनर् (अव्ययः) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | स्मा | त्तु | ध | र्षि | ता | चा | ह |
| म | पा | पा | चा | प्य | ना | थ | वत् |
| त | स्मा | त्त | व | व | धा | र्थं | वै |
| स | मु | त्प | त्स्या | म्य | हं | पु | नः |