पदच्छेदः
| कस्यासि | क (६.१)–असि (√अस् लट् म.पु. ) |
| दुहिता | दुहितृ (१.१) |
| भद्रे | भद्र (८.१) |
| को | क (१.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| भर्ता | भर्तृ (१.१) |
| तवानघे | त्वद् (६.१)–अनघ (८.१) |
| पृच्छतः | पृच्छत् (√प्रच्छ् + शतृ, ६.१) |
| शंस | शंस (√शंस् लोट् म.पु. ) |
| मे | मद् (६.१) |
| शीघ्रं | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| को | क (१.१) |
| वा | वा (अव्ययः) |
| हेतुस्तपोऽर्जने | हेतु (१.१)–तपस्–अर्जन (७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| क | स्या | सि | दु | हि | ता | भ | द्रे |
| को | वा | भ | र्ता | त | वा | न | घे |
| पृ | च्छ | तः | शं | स | मे | शी | घ्रं |
| को | वा | हे | तु | स्त | पो | ऽर्ज | ने |