पदच्छेदः
| ततस्तं | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.१) |
| निर्जितं | निर्जित (√निः-जि + क्त, २.१) |
| मत्वा | मत्वा (√मन् + क्त्वा) |
| घोषयामास | घोषयामास (√घोषय् प्र.पु. एक.) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| शुकः | शुक (१.१) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| जितवांश्चेति | जितवत् (√जि + क्तवतु, १.१)–च (अव्ययः)–इति (अव्ययः) |
| हर्षान्नादं | हर्ष (५.१)–नाद (२.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| मुक्तवान् | मुक्तवत् (√मुच् + क्तवतु, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्तं | नि | र्जि | तं | म | त्वा |
| घो | ष | या | मा | स | वै | शु | कः |
| रा | व | णो | जि | त | वां | श्चे | ति |
| ह | र्षा | न्ना | दं | च | मु | क्त | वान् |