M N Dutt
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पदच्छेदः
| यथान्ये | यथा (अव्ययः)–अन्य (१.३) |
| विविधै | विविध (३.३) |
| रोगैः | रोग (३.३) |
| पीड्यन्ते | पीड्यन्ते (√पीडय् प्र.पु. बहु.) |
| प्राणिनो | प्राणिन् (१.३) |
| मया | मद् (३.१) |
| ते | तद् (१.३) |
| न | न (अव्ययः) |
| ते | त्वद् (६.१) |
| प्रभविष्यन्ति | प्रभविष्यन्ति (√प्र-भू लृट् प्र.पु. बहु.) |
| मयि | मद् (७.१) |
| प्रीते | प्रीत (√प्री + क्त, ७.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| संशयः | संशय (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| य | था | न्ये | वि | वि | धै | रो | गैः |
| पी | ड्य | न्ते | प्रा | णि | नो | म | या |
| ते | न | ते | प्र | भ | वि | ष्य | न्ति |
| म | यि | प्री | ते | न | सं | श | यः |