पदच्छेदः
| अथाब्रवीद् | अथ (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| वैश्रवणः | वैश्रवण (१.१) |
| कृकलासं | कृकलास (२.१) |
| गिरौ | गिरि (७.१) |
| स्थितम् | स्थित (√स्था + क्त, २.१) |
| हैरण्यं | हैरण्य (२.१) |
| सम्प्रयच्छामि | सम्प्रयच्छामि (√सम्प्र-यम् लट् उ.पु. ) |
| वर्णं | वर्ण (२.१) |
| प्रीतिस्तवाप्यहम् | प्रीति (१.१)–त्वद् (६.१)–अपि (अव्ययः)–मद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | था | ब्र | वी | द्वै | श्र | व | णः |
| कृ | क | ला | सं | गि | रौ | स्थि | तम् |
| है | र | ण्यं | सं | प्र | य | च्छा | मि |
| व | र्णं | प्री | ति | स्त | वा | प्य | हम् |