M N Dutt
And like to showers pouring down on the top of a mountain, his shafts did not inflict any wound (on Ravana).
पदच्छेदः
| तस्य | तद् (६.१) |
| बाणाः | बाण (१.३) |
| पतन्तस्ते | पतत् (√पत् + शतृ, १.३)–तद् (१.३) |
| चक्रिरे | चक्रिरे (√कृ लिट् प्र.पु. बहु.) |
| न | न (अव्ययः) |
| क्षतं | क्षत (२.१) |
| क्वचित् | क्वचिद् (अव्ययः) |
| वारिधारा | वारि–धारा (१.३) |
| इवाभ्रेभ्यः | इव (अव्ययः)–अभ्र (५.३) |
| पतन्त्यो | पतत् (√पत् + शतृ, १.३) |
| नगमूर्धनि | नग–मूर्धन् (७.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्य | बा | णाः | प | त | न्त | स्ते |
| च | क्रि | रे | न | क्ष | तं | क्व | चित् |
| वा | रि | धा | रा | इ | वा | भ्रे | भ्यः |
| प | त | न्त्यो | न | ग | मू | र्ध | नि |