M N Dutt
As he was speaking thus, the king, whose sounds were fast running out said: 'What can I do in this matter. Verily time is incapable of being controlled.
पदच्छेदः
| तस्यैवं | तद् (६.१)–एवम् (अव्ययः) |
| ब्रुवतो | ब्रुवत् (√ब्रू + शतृ, ६.१) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| मन्दासुर् | मन्दासु (१.१) |
| वाक्यम् | वाक्य (२.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| किं | क (१.१) |
| शक्यम् | शक्य (१.१) |
| इह | इह (अव्ययः) |
| कर्तुं | कर्तुम् (√कृ + तुमुन्) |
| वै | वै (अव्ययः) |
| यत् | यद् (१.१) |
| कालो | काल (१.१) |
| दुरतिक्रमः | दुरतिक्रम (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| त | स्यै | वं | ब्रु | व | तो | रा | जा |
| म | न्दा | सु | र्वा | क्य | म | ब्र | वीत् |
| किं | श | क्य | मि | ह | क | र्तुं | वै |
| य | त्का | लो | दु | र | ति | क्र | मः |