उत्पत्स्यते कुले ह्यस्मिन्निक्ष्वाकूणां महात्मनाम् ।
राजा परमतेजस्वी यस्ते प्राणान्हरिष्यति ॥
उत्पत्स्यते कुले ह्यस्मिन्निक्ष्वाकूणां महात्मनाम् ।
राजा परमतेजस्वी यस्ते प्राणान्हरिष्यति ॥
M N Dutt
There shall spring in the line of the highsouled Ikşvāku, one named Rāma son to Dasaratha who shall deprive your life.पदच्छेदः
| उत्पत्स्यते | उत्पत्स्यते (√उत्-पद् लृट् प्र.पु. एक.) |
| कुले | कुल (७.१) |
| ह्यस्मिन्न् | हि (अव्ययः)–इदम् (७.१) |
| इक्ष्वाकूणां | इक्ष्वाकु (६.३) |
| महात्मनाम् | महात्मन् (६.३) |
| राजा | राजन् (१.१) |
| परमतेजस्वी | परम–तेजस्विन् (१.१) |
| यस्ते | यद् (१.१)–त्वद् (६.१) |
| प्राणान् | प्राण (२.३) |
| हरिष्यति | हरिष्यति (√हृ लृट् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| उ | त्प | त्स्य | ते | कु | ले | ह्य | स्मि |
| न्नि | क्ष्वा | कू | णां | म | हा | त्म | नाम् |
| रा | जा | प | र | म | ते | ज | स्वी |
| य | स्ते | प्रा | णा | न्ह | रि | ष्य | ति |