पदच्छेदः
| अथ | अथ (अव्ययः) |
| पूर्वं | पूर्वम् (अव्ययः) |
| श्रुतार्थेन | श्रुत (√श्रु + क्त)–अर्थ (३.१) |
| सज्जितं | सत्–जित (√जि + क्त, १.१) |
| सुमहद्धि | सु (अव्ययः)–महत् (१.१)–हि (अव्ययः) |
| यत् | यद् (१.१) |
| निष्क्रामत् | निष्क्रामत् (√निः-क्रम् लङ् प्र.पु. एक.) |
| तन्नरेन्द्रस्य | तद्–नरेन्द्र (६.१) |
| बलं | बल (१.१) |
| रक्षोवधोद्यतम् | रक्षस्–वध–उद्यत (√उत्-यम् + क्त, १.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | थ | पू | र्वं | श्रु | ता | र्थे | न |
| स | ज्जि | तं | सु | म | ह | द्धि | यत् |
| नि | ष्क्रा | म | त्त | न्न | रे | न्द्र | स्य |
| ब | लं | र | क्षो | व | धो | द्य | तम् |