पदच्छेदः
| तृणबिन्दोस्तु | तृणबिन्दु (६.१)–तु (अव्ययः) |
| राजर्षेस्तनया | राजर्षि (६.१)–तनया (१.१) |
| न | न (अव्ययः) |
| शृणोति | शृणोति (√श्रु लट् प्र.पु. एक.) |
| तत् | तद् (२.१) |
| गत्वाश्रमपदं | गत्वा (√गम् + क्त्वा)–आश्रम–पद (२.१) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| विचचार | विचचार (√वि-चर् लिट् प्र.पु. एक.) |
| सुनिर्भया | सु (अव्ययः)–निर्भय (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तृ | ण | बि | न्दो | स्तु | रा | ज | र्षे |
| स्त | न | या | न | शृ | णो | ति | तत् |
| ग | त्वा | श्र | म | प | दं | त | स्य |
| वि | च | चा | र | सु | नि | र्भ | या |