M N Dutt
Seeing her in this condition, Triņabindu said, "Wherefore is the person that you bear unlike what it used to be?'
पदच्छेदः
| तां | तद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| तथाभूतां | तथाभूत (२.१) |
| तृणबिन्दुर् | तृणबिन्दु (१.१) |
| अथाब्रवीत् | अथ (अव्ययः)–अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| किं | क (२.१) |
| त्वम् | त्वद् (१.१) |
| एतत् | एतद् (२.१) |
| त्वसदृशं | तु (अव्ययः)–असदृश (२.१) |
| धारयस्यात्मनो | धारयसि (√धारय् लट् म.पु. )–आत्मन् (६.१) |
| वपुः | वपुस् (२.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| तां | तु | दृ | ष्ट्वा | त | था | भू | तां |
| तृ | ण | बि | न्दु | र | था | ब्र | वीत् |
| किं | त्व | मे | त | त्त्व | स | दृ | शं |
| धा | र | य | स्या | त्म | नो | व | पुः |