पदच्छेदः
| अपरं | अपर (२.१) |
| किं | क (२.१) |
| नु | नु (अव्ययः) |
| कृत्वैवं | कृत्वा (√कृ + क्त्वा)–एवम् (अव्ययः) |
| विधानं | विधान (२.१) |
| संविधास्यति | संविधास्यति (√संवि-धा लृट् प्र.पु. एक.) |
| कौतूहलसमुत्पन्नो | कौतूहल–समुत्पन्न (√समुत्-पद् + क्त, १.१) |
| यास्यामि | यास्यामि (√या लृट् उ.पु. ) |
| यमसादनम् | यम–सादन (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| अ | प | रं | किं | नु | कृ | त्वै | वं |
| वि | धा | नं | सं | वि | धा | स्य | ति |
| कौ | तू | ह | ल | स | मु | त्प | न्नो |
| या | स्या | मि | य | म | सा | द | नम् |