पदच्छेदः
| ततस्तान् | ततस् (अव्ययः)–तद् (२.३) |
| वध्यमानांस्तु | वध्यमान (√वध् + शानच्, २.३)–तु (अव्ययः) |
| कर्मभिर् | कर्मन् (३.३) |
| दुष्कृतैः | दुष्कृत (३.३) |
| स्वकैः | स्वक (३.३) |
| रावणो | रावण (१.१) |
| मोचयामास | मोचयामास (√मोचय् प्र.पु. एक.) |
| विक्रमेण | विक्रम (३.१) |
| बलाद् | बल (५.१) |
| बली | बलिन् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | त | स्ता | न्व | ध्य | मा | नां | स्तु |
| क | र्म | भि | र्दु | ष्कृ | तैः | स्व | कैः |
| रा | व | णो | मो | च | या | मा | स |
| वि | क्र | मे | ण | ब | ला | द्ब | ली |