पदच्छेदः
| विमुक्तकवचः | विमुक्त (√वि-मुच् + क्त)–कवच (१.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| सिक्तः | सिक्त (√सिच् + क्त, १.१) |
| शोणितविस्रवैः | शोणित–विस्रव (३.३) |
| स | तद् (१.१) |
| पुष्पकं | पुष्पक (२.१) |
| परित्यज्य | परित्यज्य (√परि-त्यज् + ल्यप्) |
| पृथिव्याम् | पृथिवी (७.१) |
| अवतिष्ठत | अवतिष्ठत (√अव-स्था लोट् म.पु. द्वि.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | मु | क्त | क | व | चः | क्रु | द्धो |
| सि | क्तः | शो | णि | त | वि | स्र | वैः |
| स | पु | ष्प | कं | प | रि | त्य | ज्य |
| पृ | थि | व्या | म | व | ति | ष्ठ | त |