M N Dutt
And garlanded with glory that shaft followed byghosts,* in that encounter; rushed on, burning to ashes the loose bushes and trees lying in its way. *The instrument being Siva's, it naturally was followed by ghosts as his attendants.
पदच्छेदः
| ज्वालामाली | ज्वाला–मालिन् (१.१) |
| स | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| शरः | शर (१.१) |
| क्रव्यादानुगतो | क्रव्याद–अनुगत (√अनु-गम् + क्त, १.१) |
| रणे | रण (७.१) |
| मुक्तो | मुक्त (√मुच् + क्त, १.१) |
| गुल्मान् | गुल्म (२.३) |
| द्रुमांश्चैव | द्रुम (२.३)–च (अव्ययः)–एव (अव्ययः) |
| भस्म | भस्मन् (२.१) |
| कृत्वा | कृत्वा (√कृ + क्त्वा) |
| प्रधावति | प्रधावति (√प्र-धाव् लट् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ज्वा | ला | मा | ली | स | तु | श | रः |
| क्र | व्या | दा | नु | ग | तो | र | णे |
| मु | क्तो | गु | ल्मा | न्द्रु | मां | श्चै | व |
| भ | स्म | कृ | त्वा | प्र | धा | व | ति |