M N Dutt
Knowing that his forces had been slain, he, with his eyes crimsoned with passion hastily spoke to his charioteer, ‘Bring you my car.'
पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| योधान् | योध (२.३) |
| हतान्मत्वा | हत (√हन् + क्त, २.३)–मत्वा (√मन् + क्त्वा) |
| क्रोधपर्याकुलेक्षणः | क्रोध–पर्याकुल–ईक्षण (१.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| त्वरितं | त्वरितम् (अव्ययः) |
| सूतं | सूत (२.१) |
| रथः | रथ (१.१) |
| समुपनीयताम् | समुपनीयताम् (√समुप-नी प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| स | तु | यो | धा | न्ह | ता | न्म | त्वा |
| क्रो | ध | प | र्या | कु | ले | क्ष | णः |
| अ | ब्र | वी | त्त्व | रि | तं | सू | तं |
| र | थः | स | मु | प | नी | य | ताम् |