पदच्छेदः
| एतत् | एतद् (२.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| वचनं | वचन (२.१) |
| श्रुत्वा | श्रुत्वा (√श्रु + क्त्वा) |
| धर्मराजः | धर्मराज (१.१) |
| प्रतापवान् | प्रतापवत् (१.१) |
| अब्रवीत् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| तत्र | तत्र (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| मृत्युमयम् | मृत्यु (२.१)–इदम् (१.१) |
| एनं | एनद् (२.१) |
| निहन्म्यहम् | निहन्मि (√नि-हन् लट् उ.पु. )–मद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | त | त्तु | व | च | नं | श्रु | त्वा |
| ध | र्म | रा | जः | प्र | ता | प | वान् |
| अ | ब्र | वी | त्त | त्र | तं | मृ | त्यु |
| म | य | मे | नं | नि | ह | न्म्य | हम् |