M N Dutt
For, O foremost of celestials, I have conferred a boon on him; and you should not render false the words that I have uttered.
पदच्छेदः
| वरः | वर (१.१) |
| खलु | खलु (अव्ययः) |
| मया | मद् (३.१) |
| दत्तस्तस्य | दत्त (√दा + क्त, १.१)–तद् (६.१) |
| त्रिदशपुंगव | त्रिदश–पुंगव (८.१) |
| तत् | तद् (१.१) |
| त्वया | त्वद् (३.१) |
| नानृतं | न (अव्ययः)–अनृत (१.१) |
| कार्यं | कार्य (√कृ + कृत्, १.१) |
| यन्मया | यद् (१.१)–मद् (३.१) |
| व्याहृतं | व्याहृत (√व्या-हृ + क्त, १.१) |
| वचः | वचस् (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| व | रः | ख | लु | म | या | द | त्त |
| स्त | स्य | त्रि | द | श | पुं | ग | व |
| त | त्त्व | या | ना | नृ | तं | का | र्यं |
| य | न्म | या | व्या | हृ | तं | व | चः |