M N Dutt
Thus addressed, Yama then answered, I restrain this rod. You are our lord.
पदच्छेदः
| एवम् | एवम् (अव्ययः) |
| उक्तस्तु | उक्त (√वच् + क्त, १.१)–तु (अव्ययः) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| प्रत्युवाच | प्रत्युवाच (√प्रति-वच् लिट् प्र.पु. एक.) |
| यमस्तदा | यम (१.१)–तदा (अव्ययः) |
| एष | एतद् (१.१) |
| व्यावर्तितो | व्यावर्तित (√व्या-वर्तय् + क्त, १.१) |
| दण्डः | दण्ड (१.१) |
| प्रभविष्णुर् | प्रभविष्णु (१.१) |
| भवान् | भवत् (१.१) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| नः | मद् (६.३) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| ए | व | मु | क्त | स्तु | ध | र्मा | त्मा |
| प्र | त्यु | वा | च | य | म | स्त | दा |
| ए | ष | व्या | व | र्ति | तो | द | ण्डः |
| प्र | भ | वि | ष्णु | र्भ | वा | न्हि | नः |