M N Dutt
In front (of his car) stood death, equipped with prāsas and maces in his hands, who makes nothing of this entire triune world; incapable of deterioration.
पदच्छेदः
| पाशमुद्गरहस्तश्च | पाश–मुद्गर–हस्त (१.१)–च (अव्ययः) |
| मृत्युस्तस्याग्रतः | मृत्यु (१.१)–तद् (६.१)–अग्रतस् (अव्ययः) |
| स्थितः | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| येन | यद् (३.१) |
| संक्षिप्यते | संक्षिप्यते (√सम्-क्षिप् प्र.पु. एक.) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| त्रैलोक्यं | त्रैलोक्य (१.१) |
| सचराचरम् | स (अव्ययः)–चराचर (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| पा | श | मु | द्ग | र | ह | स्त | श्च |
| मृ | त्यु | स्त | स्या | ग्र | तो | स्थि | तः |
| ये | न | सं | क्षि | प्य | ते | स | र्वं |
| त्रै | लो | क्यं | स | च | रा | च | रम् |