पदच्छेदः
| स | तद् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| तं | तद् (२.१) |
| तादृशं | तादृश (२.१) |
| दृष्ट्वा | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा) |
| रथं | रथ (२.१) |
| लोकभयावहम् | लोक–भय–आवह (२.१) |
| नाक्षुभ्यत | न (अव्ययः)–अक्षुभ्यत (√क्षुभ् लङ् म.पु. द्वि.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| रक्षो | रक्षस् (१.१) |
| व्यथा | व्यथा (१.१) |
| चैवास्य | च (अव्ययः)–एव (अव्ययः)–इदम् (६.१) |
| नाभवत् | न (अव्ययः)–अभवत् (√भू लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| स | तु | तं | ता | दृ | शं | दृ | ष्ट्वा |
| र | थं | लो | क | भ | या | व | हम् |
| ना | क्षु | भ्य | त | त | दा | र | क्षो |
| व्य | था | चै | वा | स्य | ना | भ | वत् |