एतान्सर्वान्वराँल्लब्ध्वा पुत्रस्तेऽयं दशानन ।
अद्य यज्ञसमाप्तौ च त्वत्प्रतीक्षः स्थितो अहम् ॥
एतान्सर्वान्वराँल्लब्ध्वा पुत्रस्तेऽयं दशानन ।
अद्य यज्ञसमाप्तौ च त्वत्प्रतीक्षः स्थितो अहम् ॥
M N Dutt
Having obtained these boons your son, O you having ten faces, and myself, the sacrifice being finished, have been waiting to behold you.पदच्छेदः
| एतान् | एतद् (२.३) |
| सर्वान् | सर्व (२.३) |
| वरांल्लब्ध्वा | वर (२.३)–लब्ध्वा (√लभ् + क्त्वा) |
| पुत्रस्ते | पुत्र (१.१)–त्वद् (६.१) |
| ऽयं | इदम् (१.१) |
| दशानन | दशानन (८.१) |
| अद्य | अद्य (अव्ययः) |
| यज्ञसमाप्तौ | यज्ञ–समाप्ति (७.१) |
| च | च (अव्ययः) |
| त्वत्प्रतीक्षः | त्वद्–प्रतीक्ष (१.१) |
| स्थितो | स्थित (√स्था + क्त, १.१) |
| ऽहम् | मद् (१.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| ए | ता | न्स | र्वा | न्व | रा | ल्ल | ब्ध्वा |
| पु | त्र | स्ते | ऽयं | द | शा | न | न |
| अ | द्य | य | ज्ञ | स | मा | प्तौ | च |
| त्व | त्प्र | ती | क्षः | स्थि | तो | अ | हम् |