पदच्छेदः
| ततो | ततस् (अव्ययः) |
| ऽब्रवीद् | अब्रवीत् (√ब्रू लङ् प्र.पु. एक.) |
| दशग्रीवः | दशग्रीव (१.१) |
| क्रुद्धः | क्रुद्ध (√क्रुध् + क्त, १.१) |
| संरक्तलोचनः | संरक्त (√सम्-रञ्ज् + क्त)–लोचन (१.१) |
| कल्प्यतां | कल्प्यताम् (√कल्पय् प्र.पु. एक.) |
| मे | मद् (६.१) |
| रथः | रथ (१.१) |
| शीघ्रं | शीघ्रम् (अव्ययः) |
| शूराः | शूर (१.३) |
| सज्जीभवन्तु | सज्जीभवन्तु (√सज्जी-भू लोट् प्र.पु. बहु.) |
| च | च (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तो | ऽब्र | वी | द्द | श | ग्री | वः |
| क्रु | द्धः | सं | र | क्त | लो | च | नः |
| क | ल्प्य | तां | मे | र | थः | शी | घ्रं |
| शू | राः | स | ज्जी | भ | व | न्तु | च |