पदच्छेदः
| विभीषणस्तु | विभीषण (१.१)–तु (अव्ययः) |
| धर्मात्मा | धर्म–आत्मन् (१.१) |
| लङ्कायां | लङ्का (७.१) |
| धर्मम् | धर्म (२.१) |
| आचरत् | आचरत् (√आ-चर् लङ् प्र.पु. एक.) |
| ते | तद् (१.३) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| महाभागा | महाभाग (१.३) |
| ययुर् | ययुः (√या लिट् प्र.पु. बहु.) |
| मधुपुरं | मधु–पुर (२.१) |
| प्रति | प्रति (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| वि | भी | ष | ण | स्तु | ध | र्मा | त्मा |
| ल | ङ्का | यां | ध | र्म | मा | च | रत् |
| ते | तु | स | र्वे | म | हा | भा | गा |
| य | यु | र्म | धु | पु | रं | प्र | ति |