रथैर्नागैः खरैरुष्ट्रैर्हयैर्दीप्तैर्महोरगैः ।
राक्षसाः प्रययुः सर्वे कृत्वाकाशं निरन्तरम् ॥
रथैर्नागैः खरैरुष्ट्रैर्हयैर्दीप्तैर्महोरगैः ।
राक्षसाः प्रययुः सर्वे कृत्वाकाशं निरन्तरम् ॥
M N Dutt
All the Rākşasas went covering the sky, some on asses, some on camels, some on horses, some on quick-coursing porpoises and some on huge serpents.पदच्छेदः
| रथैर् | रथ (३.३) |
| नागैः | नाग (३.३) |
| खरैर् | खर (३.३) |
| उष्ट्रैर् | उष्ट्र (३.३) |
| हयैर् | हय (३.३) |
| दीप्तैर् | दीप्त (√दीप् + क्त, ३.३) |
| महोरगैः | महत्–उरग (३.३) |
| राक्षसाः | राक्षस (१.३) |
| प्रययुः | प्रययुः (√प्र-या लिट् प्र.पु. बहु.) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| कृत्वाकाशं | कृत्वा (√कृ + क्त्वा)–आकाश (२.१) |
| निरन्तरम् | निरन्तर (२.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| र | थै | र्ना | गैः | ख | रै | रु | ष्ट्रै |
| र्ह | यै | र्दी | प्तै | र्म | हो | र | गैः |
| रा | क्ष | साः | प्र | य | युः | स | र्वे |
| कृ | त्वा | का | शं | नि | र | न्त | रम् |