पदच्छेदः
| तद् | तद् (२.१) |
| अस्य | इदम् (६.१) |
| त्वं | त्वद् (१.१) |
| सहायार्थं | सहाय–अर्थ (२.१) |
| सबन्धुर् | स (अव्ययः)–बन्धु (१.१) |
| गच्छ | गच्छ (√गम् लोट् म.पु. ) |
| राक्षस | राक्षस (८.१) |
| स्निग्धस्य | स्निग्ध (६.१) |
| भजमानस्य | भजमान (√भज् + शानच्, ६.१) |
| युक्तम् | युक्त (१.१) |
| अर्थाय | अर्थ (४.१) |
| कल्पितुम् | कल्पितुम् (√क्ᄆप् + तुमुन्) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | द | स्य | त्वं | स | हा | या | र्थं |
| स | ब | न्धु | र्ग | च्छ | रा | क्ष | स |
| स्नि | ग्ध | स्य | भ | ज | मा | न | स्य |
| यु | क्त | म | र्था | य | क | ल्पि | तुम् |