M N Dutt
I related to him everything truly. But being possessed by lust he did not pay heed to my, words.
पदच्छेदः
| मया | मद् (३.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सर्वं | सर्व (१.१) |
| यत् | यद् (१.१) |
| सत्यं | सत्य (१.१) |
| तद्धि | तद् (१.१)–हि (अव्ययः) |
| तस्मै | तद् (४.१) |
| निवेदितम् | निवेदित (√नि-वेदय् + क्त, १.१) |
| काममोहाभिभूतात्मा | काम–मोह–अभिभूत (√अभि-भू + क्त)–आत्मन् (१.१) |
| नाश्रौषीत् | न (अव्ययः)–अश्रौषीत् (√श्रु प्र.पु. एक.) |
| तद् | तद् (२.१) |
| वचो | वचस् (२.१) |
| मम | मद् (६.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | या | तु | स | र्वं | य | त्स | त्यं |
| त | द्धि | त | स्मै | नि | वे | दि | तम् |
| का | म | मो | हा | भि | भू | ता | त्मा |
| ना | श्रौ | षी | त्त | द्व | चो | म | म |