पदच्छेदः
| यदा | यदा (अव्ययः) |
| त्वकामां | तु (अव्ययः)–अकाम (२.१) |
| कामार्तो | काम–आर्त (१.१) |
| धर्षयिष्यति | धर्षयिष्यति (√धर्षय् लृट् प्र.पु. एक.) |
| योषितम् | योषित् (२.१) |
| मूर्धा | मूर्धन् (१.१) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सप्तधा | सप्तधा (अव्ययः) |
| तस्य | तद् (६.१) |
| शकलीभविता | शकलीभविता (√शकली-भू लुट् प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| य | दा | त्व | का | मां | का | मा | र्तो |
| ध | र्ष | यि | ष्य | ति | यो | षि | तम् |
| मू | र्धा | तु | स | प्त | धा | त | स्य |
| श | क | ली | भ | वि | ता | त | दा |