M N Dutt
And carrying the fragrance rendered salutary with honey and filaments of flowers, the excellent wind blew enhancing Ravana's desire.
पदच्छेदः
| मधुपुष्परजःपृक्तं | मधुपुष्प–रजस्–पृक्त (√पृच् + क्त, २.१) |
| गन्धम् | गन्ध (२.१) |
| आदाय | आदाय (√आ-दा + ल्यप्) |
| पुष्कलम् | पुष्कल (२.१) |
| प्रववौ | प्रववौ (√प्र-वा लिट् प्र.पु. एक.) |
| वर्धयन् | वर्धयत् (√वर्धय् + शतृ, १.१) |
| कामं | काम (२.१) |
| रावणस्य | रावण (६.१) |
| सुखो | सुख (१.१) |
| ऽनिलः | अनिल (१.१) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| म | धु | पु | ष्प | र | जः | पृ | क्तं |
| ग | न्ध | मा | दा | य | पु | ष्क | लम् |
| प्र | व | वौ | व | र्ध | य | न्का | मं |
| रा | व | ण | स्य | सु | खो | ऽनि | लः |