ततः प्रगृह्य शस्त्राणि सारवन्ति महान्ति च ।
शतघ्नीस्तोमरान्प्रासान्गदाखड्गपरश्वधान् ।
सुमहान्त्यद्रिशृङ्गाणि पातयामास रावणिः ॥
ततः प्रगृह्य शस्त्राणि सारवन्ति महान्ति च ।
शतघ्नीस्तोमरान्प्रासान्गदाखड्गपरश्वधान् ।
सुमहान्त्यद्रिशृङ्गाणि पातयामास रावणिः ॥
पदच्छेदः
| ततः | ततस् (अव्ययः) |
| प्रगृह्य | प्रगृह्य (√प्र-ग्रह् + ल्यप्) |
| शस्त्राणि | शस्त्र (२.३) |
| सारवन्ति | सारवत् (२.३) |
| महान्ति | महत् (२.३) |
| च | च (अव्ययः) |
| शतघ्नीस्तोमरान् | शतघ्नी (२.३)–तोमर (२.३) |
| प्रासान् | प्रास (२.३) |
| गदाखड्गपरश्वधान् | गदा–खड्ग–परश्वध (२.३) |
| सुमहान्त्यद्रिशृङ्गाणि | सु (अव्ययः)–महत् (२.३)–अद्रि–शृङ्ग (२.३) |
| पातयामास | पातयामास (√पातय् प्र.पु. एक.) |
| रावणिः | रावणि (१.१) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| त | तः | प्र | गृ | ह्य | श | स्त्रा | णि | सा | र | व | न्ति |
| म | हा | न्ति | च | श | त | घ्नी | स्तो | म | रा | न्प्रा | सा |
| न्ग | दा | ख | ड्ग | प | र | श्व | धान् | सु | म | हा | न्त्य |
| द्रि | शृ | ङ्गा | णि | पा | त | या | मा | स | रा | व | णिः |