पदच्छेदः
| प्रणाशं | प्रणाश (२.१) |
| दृश्य | दृश्य (√दृश् + क्त्वा) |
| तु | तु (अव्ययः) |
| सुरा | सुर (१.३) |
| जयन्तस्यातिदारुणम् | जयन्त (६.१)–अति (अव्ययः)–दारुण (२.१) |
| व्यथिताश्चाप्रहृष्टाश्च | व्यथित (√व्यथ् + क्त, १.३)–च (अव्ययः)–अप्रहृष्ट (१.३)–च (अव्ययः) |
| समन्ताद् | समन्तात् (अव्ययः) |
| विप्रदुद्रुवुः | विप्रदुद्रुवुः (√विप्र-द्रु लिट् प्र.पु. बहु.) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| प्र | णा | शं | दृ | श्य | तु | सु | रा |
| ज | य | न्त | स्या | ति | दा | रु | णम् |
| व्य | थि | ता | श्चा | प्र | हृ | ष्टा | श्च |
| स | म | न्ता | द्वि | प्र | दु | द्रु | वुः |