M N Dutt
The vicious-souled Kumbhakarņa armed with various weapons came you, but he did not know,* O king, with whom the conflict was going on. *For he was asleep till then so he was not acquainted with the particulars war-fare. He used to sleep for six months at a time.
पदच्छेदः
| कुम्भकर्णस्तु | कुम्भकर्ण (१.१)–तु (अव्ययः) |
| दुष्टात्मा | दुष्ट–आत्मन् (१.१) |
| नानाप्रहरणोद्यतः | नाना (अव्ययः)–प्रहरण–उद्यत (√उत्-यम् + क्त, १.१) |
| नाज्ञायत | न (अव्ययः)–अज्ञायत (√ज्ञा प्र.पु. एक.) |
| तदा | तदा (अव्ययः) |
| युद्धे | युद्ध (७.१) |
| सह | सह (अव्ययः) |
| केनाप्ययुध्यत | क (३.१)–अपि (अव्ययः)–अयुध्यत (√युध् लङ् प्र.पु. एक.) |
छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|
| कु | म्भ | क | र्ण | स्तु | दु | ष्टा | त्मा |
| ना | ना | प्र | ह | र | णो | द्य | तः |
| ना | ज्ञा | य | त | त | दा | यु | द्धे |
| स | ह | के | ना | प्य | यु | ध्य | त |