पदच्छेदः
| चित्रकर्म | चित्र–कर्मन् (१.१) |
| इवाभाति | इव (अव्ययः)–आभाति (√आ-भा लट् प्र.पु. एक.) |
| स | तद् (१.१) |
| तेषां | तद् (६.३) |
| रणसंप्लवः | रण–सम्प्लव (१.१) |
| निहतानां | निहत (√नि-हन् + क्त, ६.३) |
| प्रमत्तानां | प्रमत्त (√प्र-मद् + क्त, ६.३) |
| राक्षसानां | राक्षस (६.३) |
| महीतले | मही–तल (७.१) |
छन्दः
अनुष्टुप् [८]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|
| चि | त्र | क | र्म | इ | वा | भा | ति |
| स | ते | षां | र | ण | सं | प्ल | वः |
| नि | ह | ता | नां | प्र | म | त्ता | नां |
| रा | क्ष | सा | नां | म | ही | त | ले |