तं दृष्ट्वाथ बलात्तस्मिन्माययापहृतं रणे ।
महेन्द्रममराः सर्वे किं न्वेतदिति चुक्रुशुः ।
न हि दृश्यति विद्यावान्मायया येन नीयते ॥
तं दृष्ट्वाथ बलात्तस्मिन्माययापहृतं रणे ।
महेन्द्रममराः सर्वे किं न्वेतदिति चुक्रुशुः ।
न हि दृश्यति विद्यावान्मायया येन नीयते ॥
पदच्छेदः
| तं | तद् (२.१) |
| दृष्ट्वाथ | दृष्ट्वा (√दृश् + क्त्वा)–अथ (अव्ययः) |
| बलात् | बल (५.१) |
| तस्मिन्माययापहृतं | तद् (७.१)–माया (३.१)–अपहृत (√अप-हृ + क्त, २.१) |
| रणे | रण (७.१) |
| महेन्द्रम् | महत्–इन्द्र (२.१) |
| अमराः | अमर (१.३) |
| सर्वे | सर्व (१.३) |
| किं | क (१.१) |
| न्वेतद् | नु (अव्ययः)–एतद् (१.१) |
| इति | इति (अव्ययः) |
| चुक्रुशुः | चुक्रुशुः (√क्रुश् लिट् प्र.पु. बहु.) |
| न | न (अव्ययः) |
| हि | हि (अव्ययः) |
| दृश्यति | दृश्यति (√दृश् लट् प्र.पु. एक.) |
| विद्यावान्मायया | विद्यावत् (१.१)–माया (३.१) |
| येन | यद् (३.१) |
| नीयते | नीयते (√नी प्र.पु. एक.) |
छन्दः
उपजातिः [११]छन्दोविश्लेषणम्
| १ | २ | ३ | ४ | ५ | ६ | ७ | ८ | ९ | १० | ११ | १२ |
|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|---|
| तं | दृ | ष्ट्वा | थ | ब | ला | त्त | स्मि | न्मा | य | या | प |
| हृ | तं | र | णे | म | हे | न्द्र | म | म | राः | स | र्वे |
| किं | न्वे | त | दि | ति | चु | क्रु | शुः | न | हि | दृ | श्य |
| ति | वि | द्या | वा | न्मा | य | या | ये | न | नी | य | ते |